महाशिवरात्रि
Maha Shivaratri
महाशिवरात्रि वर्ष की सबसे बड़ी शिव पूजा है। इस रात जागरण और उपवास से मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह तांत्रिक और योगिक साधना के लिए भी विशेष रात्रि है।
जन्माष्टमी
Janmashtami
जन्माष्टमी हिंदू धर्म का महत्वपूर्ण पर्व है जो भगवान कृष्ण के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। मथुरा, वृंदावन और द्वारका में यह पर्व विशेष उत्साह से मनाया जाता है।
नवरात्रि
Navratri
नवरात्रि वर्ष में दो बार आती है: चैत्र नवरात्रि (मार्च-अप्रैल) और शारदीय नवरात्रि (अक्टूबर)। शारदीय नवरात्रि अधिक प्रसिद्ध है। इन नौ दिनों में माँ के नौ स्वरूपों की पूजा से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं।
गणेश चतुर्थी
Ganesh Chaturthi
गणेश चतुर्थी 10 दिनों तक मनाई जाती है। लोकमान्य तिलक ने 1893 में इसे सार्वजनिक उत्सव का रूप दिया ताकि स्वतंत्रता संग्राम में एकता लाई जा सके। महाराष्ट्र में यह सबसे बड़ा उत्सव है।
राम नवमी
Ram Navami
राम नवमी हिंदू धर्म का महत्वपूर्ण पर्व है। इस दिन उपवास, रामायण पाठ और भजन-कीर्तन करने से विशेष पुण्य मिलता है। राम जी के आदर्शों को याद करने का यह दिन है।
हनुमान जयंती
Hanuman Jayanti
हनुमान जयंती पर हनुमान भक्त विशेष पूजा, उपवास और हनुमान चालीसा पाठ करते हैं। इस दिन हनुमान मंदिरों में विशेष आयोजन होते हैं और भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।
दीपावली
Diwali
दीपावली हिंदू धर्म का सबसे बड़ा और प्रमुख पर्व है। यह पाँच दिनों का महापर्व है: धनतेरस, नरक चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भाईदूज।
धनतेरस
Dhanteras
धनतेरस पर सोना, चाँदी, बर्तन और नई वस्तुएं खरीदना शुभ माना जाता है। इस दिन माँ लक्ष्मी और धन्वंतरि की पूजा होती है। घर के बाहर दीपक जलाकर यमराज को प्रसन्न किया जाता है।
बसंत पंचमी
Basant Panchami
बसंत पंचमी विद्यार्थियों और शिक्षकों का पर्व है। इस दिन विद्या, कला और संगीत की देवी माँ सरस्वती की विशेष पूजा होती है। विद्यार्थी अपनी किताबें और कलम माँ के चरणों में रखते हैं।
एकादशी
Ekadashi
एकादशी व्रत करने से समस्त पापों का नाश होता है और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह मोक्ष देने वाला व्रत माना जाता है। निर्जला एकादशी (ज्येष्ठ शुक्ल) सबसे कठिन और फलदायी एकादशी है।
सावन (श्रावण)
Sawan Month
सावन माह के प्रत्येक सोमवार को शिव जी की विशेष पूजा होती है। कंवड़ यात्रा इसी माह में होती है जिसमें लाखों श्रद्धालु गंगाजल लेकर शिव मंदिरों में अभिषेक करने जाते हैं।
