कथा
धनतेरस कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष त्रयोदशी को मनाया जाता है, जो दीपावली से दो दिन पहले आता है। इस दिन समुद्र मंथन से धन्वंतरि (आयुर्वेद के देवता) अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसलिए इसे "धन्वंतरि जयंती" भी कहते हैं।
महत्व
धनतेरस पर सोना, चाँदी, बर्तन और नई वस्तुएं खरीदना शुभ माना जाता है। इस दिन माँ लक्ष्मी और धन्वंतरि की पूजा होती है। घर के बाहर दीपक जलाकर यमराज को प्रसन्न किया जाता है।
पूजा विधि
घर की साफ-सफाई करें
सोना, चाँदी या बर्तन खरीदें
संध्या समय माँ लक्ष्मी और धन्वंतरि की पूजा करें
घर के मुख्य द्वार पर यम के लिए दीपक जलाएं
लक्ष्मी मंत्र और श्री सूक्तम का पाठ करें
आरती और प्रसाद वितरण करें
परिवार के साथ पूजा करें और शुभकामनाएं दें
संबंधित देवी-देवता
इस पर्व के मंत्र
लक्ष्मी मंत्र
Lakshmi Mantraॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः॥ ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभयो नमः
धन, समृद्धि और माँ लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्ति के लिए
श्री सूक्तम
Shri Suktamहिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्। चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥ तां म आवह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम्। यस्यां हिरण्यं विन्देयं गामश्वं पुरुषानहम्॥ अश्वपूर्वां रथमध्यां हस्तिनादप्रबोधिनीम्। श्रियं देवीमुपह्वये श्रीर्मा देवी जुषताम्॥
माँ लक्ष्मी के स्थायी वास और अष्टलक्ष्मी की कृपा प्राप्ति
