कथा
भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष चतुर्थी को गणेश जी का जन्म हुआ था। माँ पार्वती ने स्नान से पहले अपने शरीर की मैल से गणेश जी को बनाया और द्वार पर पहरा देने को कहा। जब शिव जी वापस आए तो गणेश जी ने रोका। क्रोधित शिव जी ने उनका सिर काट दिया। माँ पार्वती के विलाप पर शिव जी ने हाथी का सिर लगाकर गणेश जी को जीवित किया।
महत्व
गणेश चतुर्थी 10 दिनों तक मनाई जाती है। लोकमान्य तिलक ने 1893 में इसे सार्वजनिक उत्सव का रूप दिया ताकि स्वतंत्रता संग्राम में एकता लाई जा सके। महाराष्ट्र में यह सबसे बड़ा उत्सव है।
पूजा विधि
गणेश जी की मूर्ति घर लाएं और विधिपूर्वक प्राण प्रतिष्ठा करें
षोडशोपचार पूजा करें
गणेश जी को दूर्वा, मोदक और लड्डू का भोग लगाएं
गणेश चालीसा और गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ करें
प्रतिदिन आरती करें
अंतिम दिन विसर्जन की तैयारी करें
गणपति बाप्पा मोरया का जयघोष करते हुए नदी या समुद्र में विसर्जन करें
संबंधित देवी-देवता
इस पर्व के मंत्र
गणेश मंत्र
Ganesh Mantraॐ गं गणपतये नमः ॐ श्रीं गं सौम्याय गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा। ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्तिः प्रचोदयात्॥
सभी कार्यों की निर्विघ्न सिद्धि और गणेश जी की कृपा प्राप्ति
वक्रतुंड मंत्र
Vakratunda Mantraवक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
गणेश जी के वक्रतुंड स्वरूप की पूजा और सभी विघ्नों का नाश
