भाद्रपद (अगस्त)

जन्माष्टमी

Janmashtami

कथा

भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष अष्टमी को मध्यरात्रि 12 बजे मथुरा के कारागार में भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था। उनके पिता वसुदेव ने उन्हें कंस के अत्याचारों से बचाने के लिए आधी रात को यमुना पार करके गोकुल में नंद बाबा के यहाँ छोड़ दिया। उस रात घनघोर वर्षा हो रही थी, यमुना नदी उफान पर थी, लेकिन शेषनाग ने छत्र धारण करके रक्षा की और यमुना ने मार्ग दे दिया।

महत्व

जन्माष्टमी हिंदू धर्म का महत्वपूर्ण पर्व है जो भगवान कृष्ण के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। मथुरा, वृंदावन और द्वारका में यह पर्व विशेष उत्साह से मनाया जाता है।

पूजा विधि

  1. उपवास रखें और मन को पवित्र करें

  2. शाम को कृष्ण जी की मूर्ति को नए वस्त्र और आभूषण पहनाएं

  3. रात्रि 12 बजे तक कृष्ण भजन और कीर्तन करें

  4. मध्यरात्रि में पंचामृत से कृष्ण जी का अभिषेक करें

  5. माखन-मिश्री, पंजीरी और धनिया का भोग लगाएं

  6. आरती और प्रसाद वितरण करें

  7. दही-हांडी उत्सव (विशेषकर महाराष्ट्र में) आयोजित करें

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इस पर्व के मंत्र

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