कथा
भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष अष्टमी को मध्यरात्रि 12 बजे मथुरा के कारागार में भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था। उनके पिता वसुदेव ने उन्हें कंस के अत्याचारों से बचाने के लिए आधी रात को यमुना पार करके गोकुल में नंद बाबा के यहाँ छोड़ दिया। उस रात घनघोर वर्षा हो रही थी, यमुना नदी उफान पर थी, लेकिन शेषनाग ने छत्र धारण करके रक्षा की और यमुना ने मार्ग दे दिया।
महत्व
जन्माष्टमी हिंदू धर्म का महत्वपूर्ण पर्व है जो भगवान कृष्ण के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। मथुरा, वृंदावन और द्वारका में यह पर्व विशेष उत्साह से मनाया जाता है।
पूजा विधि
उपवास रखें और मन को पवित्र करें
शाम को कृष्ण जी की मूर्ति को नए वस्त्र और आभूषण पहनाएं
रात्रि 12 बजे तक कृष्ण भजन और कीर्तन करें
मध्यरात्रि में पंचामृत से कृष्ण जी का अभिषेक करें
माखन-मिश्री, पंजीरी और धनिया का भोग लगाएं
आरती और प्रसाद वितरण करें
दही-हांडी उत्सव (विशेषकर महाराष्ट्र में) आयोजित करें
संबंधित देवी-देवता
इस पर्व के मंत्र
हरे कृष्ण महामंत्र
Hare Krishna Mahamantraहरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
कलियुग में मोक्ष और परम आनंद की प्राप्ति का सर्वश्रेष्ठ मंत्र
गोविंद नाम
Govind Naamॐ गोविन्दाय नमः गोविन्द गोविन्द गोविन्द कृष्ण गोपाल गोविन्द। जय जय गोविन्द जय जय गोविन्द नन्द के नन्दन गोविन्द॥
कृष्ण के गोविंद स्वरूप की आराधना और समस्त सुखों की प्राप्ति
