कृष्ण

कृष्ण चालीसा

Krishna Chalisa

लाभ एवं फल

प्रेम, भक्ति और आनंद की प्राप्तिमन की शांति और चिंताओं से मुक्तिजीवन में कृष्ण कृपा और सफलतापरिवार में प्रेम और एकताभगवद्गीता के ज्ञान का अनुभव

अर्थ

कृष्ण चालीसा भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं और महिमा का गुणगान करती है। जन्माष्टमी पर इसका पाठ विशेष फलदायी है।

📿

चालीसा पाठ

॥ दोहा ॥
बंशी वाले श्री कृष्ण, राधा के हो नाथ।
जन्माष्टमी पर करूँ, मैं पाठ तुम्हारे साथ॥

॥ चालीसा ॥
जय श्रीकृष्ण कृपानिधाना।
यदुवंशी भव भय हरणा॥१॥

वसुदेव नंदन नंद किशोरा।
जगत जनक जीवन के भोरा॥२॥

गोकुल में जन्मे अवतारा।
भक्तों के तुम रखवारा॥३॥

कालिया नाग को नाथ किया था।
गोपियों के मन हर लिया था॥४॥

राधा प्रिय मुरलीधर श्यामा।
गोपीनाथ हरण कर कामा॥५॥

कुरुक्षेत्र में गीता सुनाई।
अर्जुन को राह दिखाई॥६॥

द्वारका नगरी बनाई सुंदर।
नाम लेत जाते सब दुख दूर॥७॥

राधा कृष्ण का प्रेम अपारा।
नित नित जपते भक्त तुम्हारा॥८॥

हरे कृष्ण जप करत हमेशा।
मिट जाते सारे दुख क्लेशा॥९॥

जय जय कृष्ण मुरारी नाथा।
चरण में रखो हमारे माथा॥१०॥

॥ दोहा ॥
कृष्ण चालीसा पाठ से, होत पूर्ण मनोरथ।
भव बाधा सब दूर हो, मिले प्रभु का साथ॥

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