
कृष्ण
योगेश्वर, गोविंद, कन्हैया
परिचय
भगवान कृष्ण विष्णु के आठवें अवतार हैं और हिंदू धर्म के सबसे लोकप्रिय देवताओं में से एक हैं। वे मथुरा में जन्मे और वृंदावन में बड़े हुए। भगवद्गीता का उपदेश उन्होंने अर्जुन को कुरुक्षेत्र युद्ध में दिया था।
कथा
भगवान कृष्ण का जन्म मथुरा के कारागार में माता देवकी और पिता वसुदेव के यहाँ हुआ। दुष्ट मामा कंस के अत्याचारों से बचाने के लिए उन्हें गोकुल में नंद और यशोदा के यहाँ पाला गया। वृंदावन में उन्होंने गोपियों के साथ रासलीला की और कंस का वध करके मथुरा को मुक्त किया। महाभारत काल में उन्होंने अर्जुन का सारथी बनकर गीता का उपदेश दिया। उन्होंने कुरुक्षेत्र युद्ध में पांडवों की विजय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी बाँसुरी की मधुर ध्वनि से समस्त प्राणी मोहित हो जाते थे।
महत्व
भगवान कृष्ण का जीवन दर्शन भगवद्गीता में समाहित है जो विश्व का सर्वश्रेष्ठ दार्शनिक ग्रंथ माना जाता है। उनकी भक्ति और प्रेम की शिक्षा आज भी जन-जन के लिए प्रासंगिक है।
शक्तियाँ
- सुदर्शन चक्र से शत्रुओं का संहार
- योगमाया से जगत को मोह में रखने की शक्ति
- विराट स्वरूप धारण करने की शक्ति
- बाँसुरी से समस्त चराचर को आकर्षित करने की शक्ति
- गीता उपदेश द्वारा जीवात्मा को मोक्ष का मार्ग दिखाना
आशीर्वाद
- प्रेम और भक्ति में वृद्धि
- जीवन की कठिन परिस्थितियों में मार्गदर्शन
- मन की शांति और आनंद की प्राप्ति
- संतान प्राप्ति और बालकों की रक्षा
- कर्म पथ पर चलने की प्रेरणा
प्रमुख मंत्र
आरती
चालीसा
सामान्य प्रश्न
भगवान कृष्ण का जन्म कब और कहाँ हुआ?
भगवान कृष्ण का जन्म द्वापर युग में भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मध्यरात्रि में मथुरा के कारागार में हुआ था।
कृष्ण की बाँसुरी का क्या महत्व है?
कृष्ण की बाँसुरी प्रेम और दिव्यता का प्रतीक है। बाँसुरी की मधुर ध्वनि आत्मा को परमात्मा की ओर आकर्षित करती है। यह जीव और ब्रह्म के मिलन का प्रतीक है।
भगवद्गीता में कृष्ण ने क्या उपदेश दिया?
भगवद्गीता में कृष्ण जी ने कर्मयोग, भक्तियोग, ज्ञानयोग और राजयोग का उपदेश दिया। उन्होंने कहा कि फल की चिंता किए बिना कर्म करो और ईश्वर की शरण में रहो।
राधा और कृष्ण का संबंध क्या है?
राधा और कृष्ण का संबंध दिव्य प्रेम का प्रतीक है। राधा जी आत्मा का और कृष्ण परमात्मा का प्रतीक हैं। उनका प्रेम भक्ति की सर्वोच्च अवस्था का प्रतीक है।
