लाभ एवं फल
✦शत्रुओं पर विजय और भयमुक्ति✦नवरात्रि में पाठ से नौ गुना फल✦घर में सुख-शांति और समृद्धि✦तंत्र-मंत्र और बुरी नजर से सुरक्षा✦संतान प्राप्ति और परिवार की रक्षा
अर्थ
दुर्गा चालीसा माँ दुर्गा के नौ रूपों की महिमा गाती है। नवरात्रि में इसका पाठ विशेष फलदायी है।
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चालीसा पाठ
॥ दोहा ॥ नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो अम्बे दुख हरनी॥ ॥ चालीसा ॥ निरंकार है ज्योति तुम्हारी। तिहूँ लोक फैली उजियारी॥१॥ शशि ललाट मुख महाविशाला। नेत्र लाल भृकुटि विकराला॥२॥ रूप मातु को अधिक सुहावे। दरश करत जन अति सुख पावे॥३॥ तुम संसार शक्ति लय कीना। पालन हेतु अन्न धन दीना॥४॥ अन्नपूर्णा हुई जग पाला। तुमने लिया तीनों पाला॥५॥ तुम सन शक्ति की पूजा करते। रिद्धि सिद्धि दायिनी तुम सर्वे॥६॥ जय जय माँ दुर्गे शक्ति धाम। देव दानव करें नित प्रणाम॥७॥ लंका में तुमने हुई काली। दैत्यों का संहार किया भाली॥८॥ आदि शक्ति माँ जगत जननी। महिषासुर मर्दिनी अति धुनि॥९॥ नौ रूप में तुम अखिल जगत में। शक्ति रूपा विराजत हर मन में॥१०॥ जय जय माँ दुर्गे जगदम्बे। भक्तों की करो दुर्गति शम्बे॥११॥ तुम हो आदि शक्ति विश्वंभरी। तुम्हारी महिमा नित निहारी॥१२॥ नवरात्रि में पूजन तेरा। करे जो नर पावे फल मेरा॥१३॥ शुम्भ निशुम्भ को तुमने मारा। भक्तों को दिया अभयकारा॥१४॥ मेरी माँ मुझे शक्ति दे दो। सन्मार्ग पर चलाए दे दो॥१५॥ जय अम्बे जय जय माँ काली। माँग करती तेरी बाली॥१६॥ जय जय माँ भवानी शंकरी। पापों की करती रहो हरी॥१७॥ प्रसन्न होकर माँ वरदाती। भक्तों की आशा पूर्ण हो जाती॥१८॥ जय माँ दुर्गे जय माँ दुर्गे। दुख-दर्द सब हो जायें खुर्गे॥१९॥ भक्त जन की रक्षा करती हो। दुर्गे माँ दुर्गे माँ जय हो॥२०॥ ॥ दोहा ॥ कंचनपुर में जन्मी माँ, कहलाई दुर्गे महान। जो पाठ करे चालीसे का, पाए निश्चित वरदान॥
