Vishnu — पालनहार, जगत के रक्षक
देवता

विष्णु

पालनहार, जगत के रक्षक

परिचय

भगवान विष्णु त्रिदेवों में पालनकर्ता हैं और सृष्टि के संरक्षक देवता हैं। वे क्षीरसागर में शेषनाग पर विराजमान हैं और उनकी अर्धांगिनी माता लक्ष्मी हैं। विष्णु जी ने धर्म की रक्षा के लिए अनेक अवतार लिए हैं।

कथा

भगवान विष्णु अनादि और सर्वव्यापी हैं। वे क्षीरसागर में शेषनाग की शय्या पर विश्राम करते हैं। जब-जब पृथ्वी पर पाप और अधर्म बढ़ता है, वे अवतार लेकर धर्म की स्थापना करते हैं। उनके दशावतारों में मत्स्य, कूर्म, वराह, नृसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण, बलराम और कल्कि प्रमुख हैं। विष्णु जी के हाथों में शंख, चक्र, गदा और पद्म हैं। उनका वाहन गरुड़ है। सुदर्शन चक्र उनका प्रमुख अस्त्र है जो समस्त पापों का नाश करता है।

महत्व

विष्णु जी सृष्टि के पालनहार हैं। उनकी पूजा से जीवन में स्थिरता, समृद्धि और धर्म की प्राप्ति होती है। एकादशी व्रत उनकी विशेष पूजा है जो मोक्ष दायक मानी जाती है।

शक्तियाँ

  • सुदर्शन चक्र से समस्त दुष्टों का नाश
  • पांचजन्य शंख की ध्वनि से अधर्म का नाश
  • विश्वरूप धारण करने की अनंत शक्ति
  • सृष्टि के पालन और संरक्षण की शक्ति
  • माया द्वारा जगत को भ्रम में रखने की शक्ति

आशीर्वाद

  • जीवन में सुख, शांति और समृद्धि
  • धर्म पथ पर चलने की प्रेरणा
  • संतान प्राप्ति और परिवार की रक्षा
  • मोक्ष और वैकुंठ धाम की प्राप्ति
  • समस्त पापों से मुक्ति

प्रमुख मंत्र

आरती

सामान्य प्रश्न

भगवान विष्णु के कितने अवतार हैं?

भगवान विष्णु के मुख्य दस अवतार हैं जिन्हें दशावतार कहते हैं: मत्स्य, कूर्म, वराह, नृसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण, बलराम और कल्कि।

एकादशी व्रत का विष्णु जी से क्या संबंध है?

एकादशी तिथि भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। इस दिन उपवास रखने से विष्णु जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और मोक्ष का मार्ग खुलता है।

तुलसी विष्णु जी को क्यों चढ़ाई जाती है?

तुलसी को विष्णु प्रिया कहा जाता है। पुराणों के अनुसार तुलसी विष्णु जी की प्रिय पत्नी वृंदा का रूप है। तुलसी के बिना विष्णु जी की पूजा अधूरी मानी जाती है।

विष्णु सहस्रनाम क्या है?

विष्णु सहस्रनाम में भगवान विष्णु के 1000 नाम हैं जो महाभारत के अनुशासन पर्व में भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को बताए थे। इसके पाठ से समस्त कष्टों का नाश होता है।