सरस्वती

सरस्वती चालीसा

Saraswati Chalisa

लाभ एवं फल

विद्या और ज्ञान की प्राप्तिपरीक्षाओं में सफलतावाणी में मधुरता और वाक्-सिद्धिकलाओं में निपुणताबसंत पंचमी पर पाठ से विशेष लाभ

अर्थ

सरस्वती चालीसा विद्या, बुद्धि और कला की देवी माँ सरस्वती की 40 चौपाइयों में स्तुति करती है।

📿

चालीसा पाठ

॥ दोहा ॥
जनक जननी पाद युग, पूजत परम सुनील।
जो चाहत नित सुयश को, करत सरस्वती लीन॥

॥ चालीसा ॥
जय श्री सरस्वती माता।
सद्गुण वैभव शालिनी,विद्या दात्री माता॥१॥

चन्द्रवदन पद्मासिनी, द्युति मंगलकारी।
सोहत हंस सवारी, अतुल तेजधारी॥२॥

बाएँ कर में वीणा शोभित।
दाएँ कर में माला जोशित॥३॥

शीश मुकुट मणि सोहत न्यारी।
गल मोतियन की माला धारी॥४॥

देवी शरण जो नर आवे।
सद्ज्ञान विद्या वाणी पावे॥५॥

रिद्धि सिद्धि देती हो माई।
ज्ञान-ध्यान में रहती सहाई॥६॥

वीणावादिनी विद्यादायिनी।
भव बाधाओं की हारिणी॥७॥

जय जय माँ सरस्वती भवानी।
कवि कोविद मिलकर गावत बानी॥८॥

श्वेत वस्त्र धारण करती हो।
पवित्रता की मूर्ति हो तुम॥९॥

बसंत पंचमी को पूजन करके।
भक्त पाते ज्ञान अपने घर में॥१०॥

॥ दोहा ॥
सरस्वती चालीसा पाठ, करे जो भक्त सुजान।
मिले विद्या वाणी यश, करे माता कल्याण॥

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