अष्टविनायक तीर्थ
पुणे और आसपास, महाराष्ट्र
इतिहास
अष्टविनायक महाराष्ट्र में गणेश जी के आठ स्वयंभू (स्वयं प्रकट) मंदिर हैं। ये आठ मंदिर हैं: मोरगांव (मोरेश्वर), सिद्धटेक (सिद्धिविनायक), पाली (बल्लाळेश्वर), महड़ (वरदविनायक), थेऊर (चिंतामणि), लेण्याद्री (गिरिजात्मज), ओझर (विघ्नेश्वर) और रांजणगांव (महागणपति)।
महत्व
अष्टविनायक की यात्रा करने से समस्त पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह यात्रा महाराष्ट्र का सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक सर्किट है।
वास्तुकला
प्रत्येक मंदिर की अपनी विशेषता है। सभी आठ स्थानों पर गणेश जी की स्वयंभू मूर्तियाँ हैं जो अलग-अलग मुद्राओं और आकारों में हैं।
