कार्तिकेय

कार्तिकेय आरती

🕐सर्वश्रेष्ठ समय: षष्ठी तिथि और मंगलवार को, प्रातःकाल
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आरती पाठ

जय कार्तिकेय, जय कार्तिकेय।
देव सेना के सेनापति, हे कार्तिकेय॥
जय कार्तिकेय॥

षण्मुख स्वामी, शरवण भव।
मोर वाहन पर विराजत, हे सुब्रह्मण्य॥
जय कार्तिकेय॥

शक्ति हस्त धारी, तारकासुर मारी।
देव दुखहारी, स्कंद कुमारी॥
जय कार्तिकेय॥

अंजलि शीर्ष नवाएं, पाद पंकज ध्याएं।
पार्वती-पुत्र, शिव-कुमार को गाएं॥
जय कार्तिकेय॥

तमिल भक्त मुरुगा, उत्तर में स्कंद।
छह मुखों वाले, जय-जय कार्तिकेय॥
जय कार्तिकेय॥

जो जन आरती गावे, मनोकामना पावे।
शत्रु-भय दूर जावे, स्वामी कार्तिकेय॥
जय कार्तिकेय॥

अर्थ

इस आरती में कार्तिकेय के षण्मुख (छह मुख), मोर वाहन, शक्ति अस्त्र और तारकासुर वध का वर्णन है। दक्षिण भारत में वे मुरुगन के नाम से पूजे जाते हैं।